विजयदशमी का पर्व बीते 28 दिन गुजर चुके हैं, दीपावली और उसके बाद छठ पर्व भी बीत चुका है। स्कूली बच्चों की छुट्टियाँ समाप्त होकर विद्यालय दोबारा संचालित हो रहे हैं, लेकिन नगर के स्कूल प्रांगण से रावण दहन का मलबा अब तक नहीं हटाया गया है। यह स्थिति दुर्गा पूजा समिति की लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
वाहवाही तो खूब, पर जिम्मेदारी निभाने में नाकाम
समिति ने नवरात्र में नव दिनों तक पूजा अर्चना के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जिसमे क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने निरन्तर सामिल होकर फोटो खिंचवाकर वाहवाही तो खूब लूटी, पर अब वही जनप्रतिनिधि प्रांगण की सफाई कराने में पूरी तरह नाकाम दिखाई दे रहे हैं।
कीचड़ और कूड़ा — बच्चों के खेलने की जगह खतरे में
प्रांगण का बड़ा हिस्सा कीचड़, राख और जले हुए ढांचे से भरा पड़ा है। हालात इतने खराब हैं कि बच्चे उसी गंदगी और मलबे के बीच खेलने को मजबूर हैं। यह न केवल असुविधाजनक दृश्य है बल्कि उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है।
पानी टंकी का ओवरफ्लो — मैदान दलदल में तब्दील
स्कूल प्रांगण में निर्मित पानी टंकी के ओवरफ़्लो होने के कारण मैदान का बड़ा हिस्सा हमेशा गीला और दलदली रहता है। रावण के अवशेष और निरंतर जमा होता पानी मैदान को और बदतर बना रहे हैं।
ऐसे में बच्चों का सर्वांगीण विकास कैसे?
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है जब खेल का मैदान ही सुरक्षित और स्वच्छ नहीं होगा तो बच्चों का सर्वांगीण विकास कैसे होगा?”
नागरिकों की मांग — तुरंत हो सफाई
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि तत्काल प्रांगण से मलबा हटवाया जाए, दलदल को भरकर मैदान को समतल किया जाए और बच्चों के लिए स्वच्छ व सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जाए।
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